श्री साईं बाबा के ग्यारह वच?/h3>

जो शिरडी मे?आयेग? आप?दू?भगाएगा

चढ?समाध?की सीढ़ी पर, पै?तल?दुःख की पीढ़ी पर

त्या?शरी?चल?जाऊंगा, भक्त-हेतु दौड़?आऊंग?

मन मे?रखना दृढ़ विश्वा? करें समाध?पूरी आस

मुझे सद?जीवि?ही जानो, अनुभ?कर?सत्य पहचानो

मेरी शर??खाली जाये, हो तो को?मुझे बताय?

जैसा भा?रह?जि?जन का, वैसा रु?हु?मेरे मन का

भा?तुम्हारा मु?पर होगा, वच??मेरा झूठा होगा

?सहायता लो भरपू? जो मांग?वह नही है?दू?

मु?मे?ली?वच?मन काया, उसका ऋण ?कभी चुकाया

धन्य-धन्य ?भक्त अनन्? मेरी शर?तज जिसे ?अन्य